
पटना। केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सड़क निर्माण में नदी की गाद यानी सिल्ट के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार द्वारा बनाई गई नीति की सराहना की है। उन्होंने कहा कि बिहार की यह पहल पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में सामने आ सकती है। इससे सड़क निर्माण में स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा और निर्माण कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
गडकरी ने बिहार की इस नीति को संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से जोड़ते हुए महत्वपूर्ण बताया। नदी से निकलने वाली गाद का उपयोग लंबे समय से एक चुनौती और अवसर दोनों के रूप में देखा जाता रहा है। बड़ी मात्रा में जमा सिल्ट नदी की जलधारण क्षमता और प्रवाह पर असर डाल सकती है। ऐसे में यदि इसका वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाए तो इससे दोहरा लाभ हो सकता है।
एक ओर नदियों में जमा गाद के प्रबंधन में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी ओर सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए जरूरी सामग्री का स्थानीय स्तर पर विकल्प उपलब्ध हो सकेगा। इससे परिवहन लागत कम करने और निर्माण कार्यों को गति देने की संभावना भी बढ़ सकती है।
बिहार में बड़ी संख्या में नदियां बहती हैं और कई क्षेत्रों में हर साल बाढ़ के बाद बड़ी मात्रा में गाद जमा होती है। ऐसे में सिल्ट के उपयोग के लिए स्पष्ट नीति तैयार करना राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क निर्माण में इसका उपयोग बढ़ने से नदी प्रबंधन और आधारभूत ढांचे के विकास को एक साथ जोड़ने का रास्ता खुल सकता है।
नितिन गडकरी ने संकेत दिया कि बिहार में तैयार की गई यह व्यवस्था अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी हो सकती है। यदि यहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं तो दूसरे राज्यों में भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ऐसी नीति पर विचार किया जा सकता है।
सड़क निर्माण में आमतौर पर मिट्टी, बालू, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री की बड़ी मात्रा में जरूरत पड़ती है। इन सामग्रियों की उपलब्धता, परिवहन और लागत किसी भी परियोजना के बजट और समय सीमा को प्रभावित करती है। ऐसे में नदी की गाद को उपयुक्त तकनीकी मानकों के तहत निर्माण सामग्री के रूप में इस्तेमाल करना परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध करा सकता है।
इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू पर्यावरणीय प्रबंधन से भी जुड़ा है। नदियों में लगातार जमा होने वाली गाद को हटाना कई जगह आवश्यक हो जाता है। यदि निकाली गई गाद का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जाता है तो इसके भंडारण और निस्तारण की समस्या भी कम हो सकती है।
हालांकि सड़क निर्माण में सिल्ट के उपयोग के लिए इसकी गुणवत्ता, संरचना और तकनीकी उपयुक्तता का परीक्षण आवश्यक होगा। हर नदी की गाद समान प्रकृति की नहीं होती। इसलिए इसका इस्तेमाल वैज्ञानिक जांच और निर्धारित मानकों के आधार पर ही किया जा सकता है।
बिहार सरकार की नीति का उद्देश्य उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए सड़क निर्माण को अधिक व्यावहारिक और किफायती बनाना है। राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और अन्य सड़क परियोजनाओं पर लगातार काम हो रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री उपलब्ध होने से परियोजनाओं को लाभ मिल सकता है।
नदी की गाद के इस्तेमाल से परिवहन दूरी घटने की स्थिति में ईंधन की खपत और निर्माण सामग्री ढोने में लगने वाले समय को भी कम किया जा सकता है। इससे परियोजनाओं की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही स्थानीय स्तर पर संसाधनों के उपयोग से निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
बिहार में बाढ़ और नदी कटाव की समस्या भी लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। कई नदियों में गाद जमा होने से उनके प्रवाह और गहराई पर असर पड़ता है। ऐसे में सिल्ट के व्यवस्थित उपयोग को नदी प्रबंधन की व्यापक रणनीति से भी जोड़ा जा सकता है।
गडकरी की सराहना के बाद यह नीति राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन सकती है। सड़क निर्माण में वैकल्पिक और स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल को लेकर केंद्र सरकार भी लगातार नए प्रयोगों और तकनीकों को बढ़ावा देती रही है। इसी क्रम में बिहार की सिल्ट नीति को एक नए मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
राज्य सरकार के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती नीति को प्रभावी तरीके से जमीन पर लागू करने की होगी। इसके लिए सड़क निर्माण एजेंसियों, जल संसाधन विभाग, स्थानीय प्रशासन और तकनीकी संस्थानों के बीच समन्वय जरूरी होगा।
नदी से गाद निकालने से लेकर उसे निर्माण स्थल तक पहुंचाने और सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने तक पूरी प्रक्रिया के लिए स्पष्ट मानक तय करने होंगे। गुणवत्ता की जांच के साथ पर्यावरणीय नियमों का पालन भी सुनिश्चित करना होगा।
यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में सड़क निर्माण के लिए पारंपरिक सामग्रियों पर निर्भरता कुछ हद तक कम की जा सकती है। इससे प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ नदी प्रबंधन की समस्या का भी व्यावहारिक समाधान मिल सकता है।
फिलहाल नितिन गडकरी की ओर से बिहार की इस नीति की प्रशंसा ने राज्य सरकार की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सड़क परियोजनाओं में नदी की गाद का उपयोग किस स्तर तक बढ़ता है और इसके क्या परिणाम सामने आते हैं।





